रस, छंद, अलंकार, शब्द-शक्ति, साहित्य का इतिहास, काव्य-शास्त्र — उच्च स्तरीय हिंदी
शब्द का मुख्य / साक्षात् अर्थ जो सबसे पहले और सीधे मन में आए।
मुख्य अर्थ में बाधा आने पर लक्ष्य अर्थ ग्रहण किया जाए।
जब अभिधा और लक्षणा दोनों से अर्थ स्पष्ट न हो और व्यंग्य अर्थ निकले।
रस के चार अंग: स्थायीभाव + विभाव + अनुभाव + संचारीभाव (व्यभिचारीभाव)
रति | संयोग व वियोग
हास | विनोद, हँसी
शोक | विरह, वेदना
क्रोध | युद्ध, प्रतिशोध
उत्साह | युद्ध, साहस
भय | डर, आतंक
जुगुप्सा | घृणा
विस्मय | आश्चर्य
निर्वेद | वैराग्य
छंद के भेद: मात्रिक छंद (मात्राओं पर आधारित) और वर्णिक छंद (वर्णों पर आधारित)
| छंद | मात्राएँ/वर्ण | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| दोहा | अर्धाली — 13+11 | पहला विषम चरण 13 मात्रा, दूसरा 11। सम चरणों में तुक। | कबीर के दोहे |
| चौपाई | 16-16 मात्राएँ | चार चरण, प्रत्येक 16 मात्रा। दो-दो चरणों में तुक। | रामचरितमानस |
| सोरठा | 11+13 मात्राएँ | दोहे का उल्टा — विषम चरण 11, सम 13। | — |
| रोला | 11+13 मात्राएँ | चार चरण, 24-24 मात्राएँ। | — |
| कुंडलिया | दोहा+रोला | छह चरण, प्रथम शब्द = अंतिम शब्द। | गिरिधर की कुंडलियाँ |
| सवैया | 22-26 वर्ण | वर्णिक छंद, चार चरण। अनेक प्रकार। | भूषण, देव |
📝 शब्दालंकार (Sound-based):
| अलंकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुप्रास | एक ही वर्ण की आवृत्ति | चारु चंद्र की चंचल किरणें |
| यमक | एक शब्द अनेक अर्थों में | कनक-कनक ते सौगुनी (कनक=धतूरा/सोना) |
| श्लेष | एक शब्द में एक साथ अनेक अर्थ | रहिमन पानी राखिए (पानी=जल/प्रतिष्ठा/चमक) |
🎨 अर्थालंकार (Meaning-based):
| अलंकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| उपमा | दो वस्तुओं में समानता — सा, सी, सम, ज्यों | वह फूल-सी कोमल है। |
| रूपक | उपमेय में उपमान का आरोप — जैसे अभेद | मुख चंद्रमा है। |
| उत्प्रेक्षा | उपमेय में उपमान की संभावना — मानो, जनु, मनु | मानो फूलों की वर्षा हो रही है। |
| मानवीकरण | निर्जीव में चेतन का आरोप | बादल गरज रहे हैं मानो रो रहे हों। |
| अतिशयोक्ति | अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर कहना | हनुमान की पूँछ में लगाई न सकी आग। |
| विरोधाभास | विरोधी शब्द पर आधारित | बिन पानी सब सून। |
| काल | समय | अन्य नाम | प्रमुख कवि |
|---|---|---|---|
| आदिकाल | 1050–1375 ई॰ | वीरगाथा काल (शुक्ल), सिद्ध-सामंत काल | चंदबरदाई, विद्यापति, अमीर खुसरो |
| भक्तिकाल | 1375–1700 ई॰ | हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग | कबीर, तुलसी, सूर, मीरा, जायसी |
| रीतिकाल | 1700–1900 ई॰ | श्रृंगार काल, रीतिबद्ध/रीतिसिद्ध/रीतिमुक्त | केशव, बिहारी, भूषण, घनानंद |
| आधुनिककाल | 1900–अब तक | पुनर्जागरण काल, नवजागरण | भारतेंदु, निराला, महादेवी, पंत, प्रसाद, दिनकर |
| कवि | काल | प्रमुख रचना | विशेषता |
|---|---|---|---|
| तुलसीदास | भक्तिकाल | रामचरितमानस | समन्वयवादी, अवधी भाषा |
| सूरदास | भक्तिकाल | सूरसागर | वात्सल्य रस, ब्रजभाषा |
| कबीरदास | भक्तिकाल | बीजक | सामाजिक सुधार, सधुक्कड़ी भाषा |
| जयशंकर प्रसाद | आधुनिक (छायावाद) | कामायनी, आँसू | छायावाद, महाकाव्य |
| सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | आधुनिक (छायावाद) | अनामिका, परिमल | मुक्त छंद, विद्रोही स्वर |
| महादेवी वर्मा | आधुनिक (छायावाद) | यामा, नीहार | वेदना, रहस्यवाद, आधुनिक मीरा |
| रामधारीसिंह 'दिनकर' | आधुनिक (राष्ट्रीय) | रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र | वीर रस, राष्ट्रीय चेतना |
| विधा | विशेषताएँ | प्रमुख लेखक |
|---|---|---|
| कहानी | एकता, चरमोत्कर्ष, संक्षिप्तता, एक केंद्रीय उद्देश्य | प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, मोहन राकेश |
| उपन्यास | विस्तृत कथानक, अनेक पात्र, जीवन का समग्र चित्रण | प्रेमचंद (गोदान, गबन), फणीश्वरनाथ रेणु |
| नाटक | अभिनेयता, संवाद, अंक-दृश्य विभाजन, रंगमंच | भारतेंदु, जयशंकर प्रसाद, मोहन राकेश |
| एकांकी | एक अंक, एक घटना, संक्षिप्तता, तनाव | रामकुमार वर्मा, उदयशंकर भट्ट |
| निबंध | विचारात्मकता, व्यक्तित्व की छाप, भावनात्मकता | आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हज़ारीप्रसाद द्विवेदी |
| आत्मकथा | लेखक स्वयं अपनी जीवन-कथा कहता है — मैं शैली | जवाहरलाल नेहरू (मेरी कहानी) |
| जीवनी | किसी महान व्यक्ति की जीवन-कथा दूसरे द्वारा | — |
| रेखाचित्र | व्यक्तित्व का जीवंत शब्द-चित्रण, संक्षिप्त | महादेवी वर्मा (अतीत के चलचित्र) |
काव्यांश का मुख्य विचार, भाव, संदेश, कवि का उद्देश्य, सामाजिक महत्व।
भाषा, शैली, अलंकार, छंद, बिम्ब, प्रतीक, शब्द-योजना, तुकबंदी।
काव्य में इंद्रियों के माध्यम से चित्र उत्पन्न करने वाले शब्द। दृश्य-बिम्ब, श्रव्य-बिम्ब, स्पर्श-बिम्ब आदि।
किसी विचार या भाव का प्रतिनिधित्व करने वाला शब्द या चित्र। जैसे — कमल = पवित्रता, सूर्य = ज्ञान।
आकर्षक और संक्षिप्त — विषय का सार एक पंक्ति में।
कब, कहाँ, किसने लिखा — पहली पंक्ति में।
5W+1H — कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों और कैसे।
घटना का क्रमबद्ध विवरण, तथ्य, आँकड़े।
घटना का प्रभाव, भविष्य की संभावनाएँ या सुझाव।
घटनाओं का क्रम। आरंभ → विकास → चरमोत्कर्ष → अंत।
नायक, सहायक पात्र। स्वाभाविक और विश्वसनीय।
संक्षिप्त, स्वाभाविक, पात्रानुकूल संवाद।
समय और स्थान का वर्णन — वातावरण निर्माण।
सरल, प्रवाहमय, पठनीय। विषयानुकूल भाषा।
कहानी का संदेश/शिक्षा — स्पष्ट और प्रेरणादायक।
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| अँगूठा दिखाना | इनकार करना | जब मदद माँगी तो उसने अँगूठा दिखा दिया। |
| आस्तीन का साँप | विश्वासघाती | वह मित्र नहीं, आस्तीन का साँप निकला। |
| दूध का दूध पानी का पानी | न्याय करना | न्यायाधीश ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया। |
| खून-पसीना एक करना | कड़ी मेहनत | उसने खून-पसीना एक करके सफलता पाई। |
| नौ-दो ग्यारह होना | भाग जाना | चोर पुलिस देखते ही नौ-दो ग्यारह हो गया। |
| लोकोक्ति | अर्थ |
|---|---|
| अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत। | अवसर निकल जाने पर पछताना व्यर्थ है। |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा। | काम न आए तो बहाने बनाना। |
| जैसी करनी वैसी भरनी। | कर्म का फल मिलता है। |
| एक पंथ दो काज। | एक काम से दो उद्देश्य पूरे होना। |
| थोथा चना बाजे घना। | गुणहीन व्यक्ति अधिक दिखावा करता है। |